| أقيموا بني أمي صدور ركابكم، |
| فكل منايا النفس خير من الهزل |
| فإنكم لن تبلغوا كل همتي |
| ولا أربي حتى تروا منبت الأثل |
| فلو كنت مثلوج الفؤاد، |
| إذا بدا بلاد الأعادي لا أمر ولا أحلي |
| رجعت على حرسين، إذ قال مالك : |
| هلكت، وهل يلحى على بغية مثلي؟ |
| لعل انطلاقي في البلاد وبغيتي، |
| وشدي حيازيم المطية بالرحل |
| سيدفعني يوما إلى رب هجمة، |
| يدافع عنها بالعقوق وبالبخل |
وحرس واد بنجد فأضاف إليه شيئا آخر ، فقال حرسين، وقال لبيد :