| إن تنصفونا آل مروان نقترب |
| إليكم، وإلا فأذنوا ببعاد |
| فإن لنا عنكم مزاحا ومزحلا |
| بعيس، إلى ريح الفلاة صواد |
| مخيسة بزل، تخايل في البرى، |
| سوار على طول الفلاة غواد |
| وفي الأرض عن ذي الجور منأى ومذهب، |
| وكل بلاد أوطنت كبلادي |
| وماذا عسى الحجاج يبلغ جهده، |
| إذا نحن خلفنا حفير زياد؟ |
| فلولا بنو مروان كان ابن يوسف |
| كما كان عبدا من عبيد إياد |