| أتيناك نثني بالذي أنت أهله |
| عليك كما أثنى على الروض جارها |
| تقدت بي الشهباء نحو ابن جعفر، |
| سواء عليها ليلها ونهارها |
| تزور فتى قد يعلم الله أنه |
| تجود له كف بعيد غرارها |
| فوالله لولا أن تزور ابن جعفر |
| لكان قليلا في دمشق قرارها |
| فإن مت لم يوصل صديق ولم يقم |
| طريق من المعروف أنت منارها |
| ذكرتك أن فاض الفرات بأرضنا، |
| وجاش بأعلى الرقتين بحارها |
| وعندي مما خول الله هجمة |
| عطاؤك منها شولها وعشارها |
| مباركة كانت عطاء مباركا |
| تمانح كبراها وتنمى صغارها |